तुम्हारी राय का मैं मोहताज नहीं
ना ही मुझे रोकने ताकत रखते हों तुम
एक को तो मार दो गे
हम लाखों को कैसे चुप करोगे तुम
हर गली, हर मोहल्ले, हर गाव से अब आवाज आयेगा
तुम्हारे जुल्मों को अभी नहीं सहा जाएगा
सदियों से चल रहे हमारे कत्ल को
जाती के पर्दे के पीछे अब नहीं छुपाया जाएगा
हर घुसे, हर लाथ, हर गंदे स्पर्श का हिसाब होगा
हमारी हर आवाज बुलंद होगी
और तेरा कोई गुनाह माफ़ नही होगा

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